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खेती अध्यादेश, किसान आंदोलन को लेकर हरियाणा में राजनीतिक घमासान

 



चंडीगढ़, 

13 सितंबर, 2020


अन्नदाता को लेकर प्रदेश में गरमाया राजनीतिक माहौल, 

सरकार, विपक्ष आमने-सामने


हालहि में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केंद्र सरकार द्वारा खेती से सम्बंधित लाए गए तीन अध्यादेशों व इसके विरोध में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर हरियाणा में सत्तारूढ़ राजनीतिक दलों व विपक्षी पार्टियों में घमासान छिड़ गया है।


दो दिन पहले अध्यादेशों के खिलाफ आंदोलन के दौरान कुरुक्षेत्र में किसानों पर हुए लाठीचार्ज के बाद प्रदेश में राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है जिसके चलते खेती, अध्यादेश व किसान आंदोलन को लेकर सत्तारूढ़ दलों व विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति चरम सीमा पर है।


मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस व इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) जहाँ इन अध्यादेशों को 'किसान विरोधी' करार दे रही हैं तो वहीं हरियाणा में सरकार चला रही बीजेपी व सरकार में साथी दल जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) विपक्ष पर कथित अध्यादेशों को लेकर भ्रामक प्रचार फैलाने का आरोप लगा रहे हैं।


कुरुक्षेत्र के पीपली में किसानों पर हुए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अब बीजेपी द्वारा आंदोलनरत किसानों से बातचीत के लिए बनाई गई तीन सांसदों वाली कमेटी पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कथित कमेटी का मक़सद सिर्फ किसानों को गुमराह करना है। इस कमेटी के पास ना कोई संवैधानिक शक्ति है और ना ही कोई राजनीतिक इच्छा शक्ति।


हुड्डा ने कहा है, "अगर इस कमेटी के पास कोई शक्ति है तो उसे सबसे पहले किसानों पर लाठी चलाने और चलवाने वालों पर कार्रवाई करनी चाहिए। कमेटी को फौरन किसानों पर दर्ज मुक़दमे वापस लेने चाहिए। एक तरफ सरकार किसानों को मुक़दमों का डर दिखाकर दबाने में लगी है तो वहीं दूसरी तरफ बातचीत का ड्रामा कर रही है। जब सीएम या कृषि मंत्री अध्यादेशों में बदलाव के लिए नहीं तैयार तो प्रदेश अध्यक्ष की खानापूर्ति वाली कमेटी किसको देगी सुझाव? बिना संवैधानिक शक्ति और राजनीतिक इच्छा शक्ति वाली इस कमेटी का कोई औचित्य नहीं है।"


हुड्डा ने कहा कि बीजेपी किसानों के साथ बातचीत को लेकर गंभीर होती तो वो तीन अध्यादेश लाने से पहले उनसे सलाह मशविरा करती और अध्यादेशों को किसानों पर थोपने के बजाय इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी का प्रावधान ज़रूर जोड़ती। 


प्रदेश के अन्य विपक्षी दल इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला भी ऐलान कर चुके हैं के अगर 'किसान विरोधी' अध्यादेश वापस नहीं लिए गए तो उनकी पार्टी किसानों के समर्थन में सड़कों पर उतरेगी।


वहीं इस मुद्दे पर विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए हरियाणा के उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि कांग्रेस द्वारा यह भ्रामक प्रचार किया जा रहा है कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि अध्यादेशों से किसान को बहुत नुकसान होगा, जबकि इसके विपरीत इन अध्यादेशों से किसान की बचत पहले से भी ज्यादा होगी और हमारा मंडी का सिस्टम भी अच्छे तरीके से चलता रहेगा। 


रविवार को गुरुग्राम दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत के दौरान उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने किसानों से संबंधित कोई भी अध्यादेश जारी नहीं किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार तीन अध्यादेश लेकर आई है, जिनके तहत किसान की फसल एमएसपी अर्थात न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उसी तरीके से खरीदी जाती रहेगी जैसे कि अब खरीदी जा रही है, इस व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि बार-बार सरकार सरसों और नरमे आदि फसलों की खरीद के लिए निजी खरीददारों के यहां जाती थी, उनको मोनिटर करती थी। इन अध्यादेशों में ऐसे लोगों को छूट दी गई है कि अगर वे मंडी एरिया से बाहर फसल खरीदते और बेचते हैं तो मार्केट फीस नहीं देनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि इससे किसान को कोई नुकसान नहीं होगा और उनकी फसल एमएसपी पर खरीदनी सुनिश्चित की जाएगी। 


उन्होंने पीपली घटना को निंदनीय बताते हुए कहा कि वहां पर उन लोगों के विरुद्ध जांच होनी चाहिए, जिन्होंने पहले रोका और फिर उन्हीं ने अनुमति देने का काम किया।


प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जय प्रकाश दलाल ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों पर आंच नहीं आने देगी। 


उन्होंने कहा, "विपक्षी पार्टियां किसानों को गुमराह करने का प्रयास कर रही हैं लेकिन प्रदेश का किसान जागरूक और समझदार है, वह विपक्ष के बहकावे में आने वाला नहीं है।"


भिवानी में पत्रकारों को संबोधित करते हुए दलाल ने कहा कि केन्द्र सरकार ने किसानों के हित में तीन नए अध्यादेश लागू किए हैं, इन अध्यादेशों के लागू होने से किसानों को काफी फायदा होगा। किसानों को अपनी फसल बिक्री के लिए छूट दी गई है और किसी भी प्रकार से एमएसपी कम नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अब वन नेशन वन मार्केट की तर्ज पर किसानों को अपनी उपज किसी भी राज्य में ले जाकर बेचने की आजादी होगी। इससे कृषि उपज का बाधा मुक्त अंतर-राज्य व्यापार संभव हो सकेगा। किसानों को अपना उत्पाद मंडी तक ले जाने की बाध्यता नहीं होगी। आवश्यक वस्तु अधिनियम 1956 में संशोधन कर अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेलों, प्याज और आलू जैसी वस्तुओं को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटाने का फैसला किया गया है। इस फैसले से उत्पादन, भंडारण, ढुलाई और वितरण करने की आजादी से व्यापक स्तर पर उत्पादन करना संभव होगा।


उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा अध्यादेश 2020 को भी स्वीकृति दे दी है। यह अध्यादेश किसानों को शोषण के भय के बिना समानता के आधार पर सामानों की खरीद बिक्री की आजादी देगा। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों के लिए एक देश एक बाजार की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश 2020 किसानों को उनकी उपज देश में किसी भी व्यक्ति या संस्था को बेचने की इजाजत देता है। अब यह सचमुच वन नेशन वन मार्केट होगा।


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