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मोदीमय हुआ हरियाणा, लगभग दो दशक बाद हुड्डा गढ़ रोहतक भी ध्वस्त



चंडीगढ़,
24 मई, 2019

मोदीमय हुआ हरियाणा, हर सीट पर खिला कमल

हुड्डा गढ़ रोहतक भी फ़तेह, चार दशकों बाद रोहतक में लहराया भगवा  

प्रदेश ने दी देश को दो बड़ी जीत

17वीं लोकसभा के परिणामों में हरियाणा के रोम-रोम से कमल खिल उठा और तकरीबन समस्त राष्ट्र की तर्ज़ पर प्रदेश भी मोदीमय हो गया।

जैसा कि अंदेशा था प्रदेश की जनता ने 10 की 10 सीटें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की झोली में डाल दी। यहाँ तक कि अभेद्य माने जाने वाले विरोधियों के किले भी ध्वस्त हो गए और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ रोहतक से भी मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। हरियाणा में अब तक का भाजपा यह सबसे बेहतर प्रदर्शन रहा।

इस बार के लोकसभा चुनाव परिणामों में हरियाणा ने कईं नए आयाम स्थापित किए हैं।

2014 विधानसभा चुनावों में पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई भाजपा ने पहली बार हरियाणा में अपने दम पर सारी सीटे जीत कर लोकसभा चुनावों में clean sweep (पूर्ण सफाया) वाली विजय दर्ज की।

करनाल से भाजपा के (first timer) संजय भाटिया की कांग्रेस के कुलदीप शर्मा पर 656142 मतों की विजय और फरीदाबाद से पार्टी के गुर्जर धुरंधर कृष्ण पाल की कांग्रेस के अवतार भड़ाना पर 638239 वोटों की भारी जीत साथ ये दोनों जीत के अंतर वाले आंकड़े प्रदेश में तो अव्वल रहे ही, साथ हरियाणा ने भाजपा को देश की दूसरी व तीसरी बड़ी जीत भी भेंट की।

इस बार भाजपा के 10 में से 9 उम्मीदवार लाखों के अंतर से जीते हैं, हालाँकि रोहतक लोकसभा में जीत का अंतर कम रहा जहाँ भाजपा के अरविंद शर्मा ने कांग्रेस के दीपेंद्र सिंह हुड्डा को 7503 वोटों की जीत हांसिल की किन्तु अहम बात यह है कि हुड्डा परिवार गढ़ माने जाना वाला रोहतक नामक किला अरसे बाद फ़तेह किया गया है और वो भी भाजपा द्वारा क्योंकि इस लोकसभा क्षेत्र में अंतिम बार भगवा 1971 में लहराया था जब जनसंघ ने यहां से जीत हांसिल की थी और 1999 में इंडियन नैशनल लोकदल ने यह सीट जीती थी अन्यथा 1991 से लेकर लगातार रोहतक सीट पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा व उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा जीतते रहे हैं।

रोहतक सही मायनों में हुड्डा परिवार का गढ़ इसलिए माना जाता रहा है कि 1952 से लेकर 2019 तक हुए 18 लोकसभा चुनावों में भूपेंद्र हुड्डा के पिता रणबीर हुड्डा, खुद भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा ने रोहतक से 9 बार चुनाव जीता है जिसमें 2005 में हुआ उपचुनाव भी शामिल है।

प्रदेश के राजनेता और राजनीतिक विश्लेषक भले ही इस बात को नकारें परन्तु हरियाणा में भाजपा के बेहतरीन प्रदर्शन पीछे मोदी लहर अलावा गैर-जाट वोटों का ध्रुवीकरण एक मुख्य कारण रहा और शायद इसी वजह से भूपेंद्र हुड्डा व उनके सुपुत्र दीपेंद्र को सोनीपत व रोहतक से हार का सामना करना पड़ा बावजूद इसके के पूर्व हुड्डा सरकार में इन क्षेत्रों में खूब विकास कार्य हुए और सर्वाधिक नौकरियाँ बांटी गई।

रोहतक जीत के साथ अरविंद शर्मा चार बार लोकसभा सांसद बनने वाले राजनेताओं की श्रेणी में शामिल हो गए हैं जबकि गुडगाँव से जीतने वाले राव इंद्रजीत पांच बार लोकसभा सांसद बनने वाले प्रदेश के पहले राजनेता।

चौटाला परिवार के तीन युवा नेता, हिसार से जननायक जनता पार्टी (जजपा) के दुष्यंत चौटाला, सोनीपत से जजपा के दिग्विजय चौटाला और कुरुक्षेत्र से इनेलो के अर्जुन चौटाला सभी को हार का सामना करना पड़ा बल्कि दिग्विजय और अर्जुन चौटाला की तरह जजपा और इनेलो के तकरीबन सभी उम्मीदवारों की जमानत भी जब्त हुई केवल एकमात्र दुष्यंत चौटाला 288425 वोट हांसिल कर हिसार से मुक़ाबले में रहे।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को डीसी रेट पर चौकीदार की नौकरी देने का ऐलान करने वाले आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और फरीदाबाद से जेजेपी-आप के संयुक्त उम्मीदवार नवीन जयहिंद भी अपनी जमानत बचाने में नाकाम रहे।

उम्मीदवार के तौर पर विकल्प रहे 'नोटा' (None of the above यानि इनमें से कोई नहीं) ने हर लोकसभा क्षेत्र से कईं छुटमुट पार्टियों के प्रत्याशियों व निर्दलीय उम्मीदवारों को पछाड़ते हुए पूरे प्रदेश से 41358 मत प्राप्त किए।

फ़िलहाल, 2014 विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत की बात हो या निकाय चुनावों में शानदार जीत या जींद उपचुनाव ऐतिहासिक जीत हो या फिर अब 2019 लोकसभा चुनावों में हरियाणा से विपक्ष का सुखड़ा साफ़ करने वाला प्रदर्शन, भाजपा का प्रदेश में विजय अभियान जारी है अब देखना है कि इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा क्या रणनीति अपनाती है और किन चेहरों को टिकट आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही यह भी देखने वाली बात रहेगी कि यूथ की कईं मंचों बात करने वाली बीजेपी नौजवानों को कितना प्रतिनिधित्व देगी जोकि हरियाणाके लिए लोकसभा टिकट आवंटन में बिलकुल गायब था।

घायल विपक्ष किन रणनीतियों को लेकर फिर से मैदान में उतरेगा? आपसी फूट का शिकार कांग्रेस की बागडोर किस नेता के हाथ में दी जाएगी? लोसपा-बसपा गठबंधन और आप-जजपा गठबंधन के लोकसभा में मिली करारी हार के बाद क्या भविष्य रहेगा? जमानत जब्त वाली परिस्थिति का बाद दो पार्टियों में बंटे चौटाला परिवार का राजनीतिक भविष्य और रणनीति क्या होगी? ये सब बातें देखने वाली होंगी।

परन्तु सबसे अहम रहेगा जनता का मिज़ाज़। क्या लोकसभा में 'नमो' (नरेंद्र मोदी) पर मोहर लगाने वाली हरियाणा की जनता 'मनो' (मनोहर लाल) की साफ़ छवि और भाजपा सरकार में योग्यता के आधार पर दी गई नौकरियों के मुद्दे पर वोट डालेगी?

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