Header Ads

Header ADS

लोकसभा चुनाव: कांग्रेस की टिकटें, जातिगत समीकरण व युवाओं के लिए हो रही जद्दोजहद



चंडीगढ़,
11 अप्रैल, 2019

लोकसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हाल ही में हरियाणा के लिए 10 संसदीय सीटों में से 8 पर उम्मीदवारों की घोषणा की जिसमें सत्तारूढ़ पार्टी ने पुराने मोहरों पर दांव खेला और जातिगत समीकरण को ध्यान में रखते हुए टिकटें बांटी गई।

कुछ एक राजनीतिक दलों ने भी उम्मीदवारों की घोषणा की है लेकिन सबकी नज़रें अब भाजपा की मुख्य विरोधी पार्टी कांग्रेस पार्टी पर टिकी हैं जिसकी हरियाणा के लिए टिकटें बहुत जल्द घोषित होनी हैं।

कांग्रेस में ठोस सूत्रों की मानें तो उनकी पार्टी भाजपा को न सिर्फ जातिगत समीकरण के हिसाब से टक्कर देने वाली है बल्कि कईं सीटों पर युवा शक्ति को मौका देने की तैयारी भी है चूँकि बीजेपी की लिस्ट में युवा चेहरों को तवज्जो नहीं दी गई तो अब कांग्रेस इसका संभव राजनीतिक लाभ तलाशने की फ़िराक है और कईं सीटों पर इसको लेकर जद्दोजहद जारी है।

जातिगत समीकरण के साथ युवा जुगलबंदी का सबसे बड़ा उदहारण है जाटलैंड की अहम सीट मानी जाने वाली रोहतक संसदीय सीट जहाँ से फिर एक बार मौजूदा कांग्रेस सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा की टिकट निश्चित है। हालांकि, अभी भाजपा ने यहाँ उमीदवार घोषित नहीं किया है परन्तु रोहतक आज भी भाजपा के लिए कांग्रेस का सबसे सुरक्षित व अभेद्य राजनीतिक किला है।

कांग्रेस की जातिगत-युवा जुगलबंदी में आजकल काफी चर्चा में है करनाल लोकसभा सीट जोकि बीजेपी की सबसे सुरक्षित सीट मानी जाती है और करनाल व पानीपत, दो बड़े शहरों में पंजाबी समुदाय की बाहुलता को देखते हुए भाजपा ने इसी समुदाय के संजय भाटिया को टिकट दिया है। अब चर्चा ये है के यूथ कांग्रेस हरियाणा के अध्यक्ष रहे सचिन कुण्डू यहाँ से कांग्रेस की टिकट के दावेदारों में सबसे आगे हैं। हालांकि वीरेंद्र राठौर कुंडू के लिए चुनौती हैं मगर करनाल संसदीय क्षेत्र में आने वाले पानीपत ग्रामीण राजनीतिक क्षेत्र में जाट बहुलता सचिन के काम आ सकती है और ऊपर से युवा कांग्रेस ने भी कुंडू के नाम की सिफारिश कर दी है।

साथ लगती सोनीपत सीट से भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए कांग्रेस के बड़े सारे विधायकों ने सिफारिश की है और अगर ऐसा होता है तो सोनीपत से भाजपा के लिए निश्चित तौर पर मुश्किलें बढ़ जाएंगी हालांकि यहां से भी कांग्रेस बड़ा दांव खेलने की फ़िराक में है और युवा के तौर पर अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पहलवान योगेश्वर दत्त के साथ बातचीत की चर्चाएं भी जोरों पर हैं।

फरीदाबाद से भाजपा के गुर्जर बाहुबली कृष्णपाल गुर्जर के मुकाबले में पूर्व मंत्री व वरिष्ठ नेता महेंद्र प्रताप सिंह नाम सबसे आगे है परन्तु वो भी अपने सुपुत्र के लिए टिकट चाह रहे हैं। महेंद्र प्रताप सिंह अलावा गुर्जर समुदाय के अवतार भड़ाना जाट समुदाय के कर्ण दलाल भी दौड़ में शामिल हैं।

साथ लगते गुरुग्राम लोकसभा क्षेत्र से अहीरवाल के धुरन्धर राव इंद्रजीत सिंह के मुकाबले अजय यादव व आफ़ताब अहमद के नामों के सुझाव पार्टी हाईकमान के पास गए हैं जिनमे अभी तक यादव का नाम आगे है हालांकि इस संसदीय सीट पर मेव वोटों को ध्यान में रखते हुए अहमद भी बड़े उम्मीदवार साबित हो सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार, भाजपा के धर्मवीर को टक्कर देने के लिए भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा के लिए विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी की बेटी युवा श्रुति चौधरी का नाम हाईकमान को भेजा गया है।

सिरसा से हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक तंवर (जोकि खुद एक सशक्त युवा नेता मने जाते हैं) का टिकट सौ फीसदी तय है तो अन्य सुरक्षित सीट अंबाला से पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा का नाम तकरीबन फाइनल है। भाजपा ने सिरसा से सुनीता दुग्गल को टिकट दिया है तो अंबाला से पुराने उम्मीदवार व वर्तमान सांसद रतनलाल कटारिया में विश्वास जताया है।

अब बात आती है हिसार की जहां से गैर-जाट नेता कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस के बड़े नेता हैं। वैसे तो बिश्नोई का हिसार से चुनाव लड़ना तय था लेकिन अब वो अपने बेटे भव्य बिश्नोई को हिसार लोकसभा से लॉन्च करना चाहते हैं और पार्टी नेताओं के मुताबिक इस पर काफी हद तक सहमति बन भी चुकी है। हिसार से दुष्यंत चौटाला चुनाव लड़ते हैं और हर बार मतदान तक आते-आते यहां चुनाव जाट बनाम गैर-जाट हो जाता है, ऐसे में बिश्नोई परिवार जहां जातिगत समीकरण के हिसाब से अनुकूल है वहीँ अगर बिश्नोई के सुपुत्र को कांग्रेस मैदान में उतारती है तो युवा रंग भी आ जायेगा।

अंत में बचती है धर्मनगरी कुरुक्षेत्र लोकसभा। वैसे तो यहाँ से कांग्रेस के पसंदीदा व असरदार उम्मीदवार नवीन जिंदल कही नाम अभी तक चर्चाओं में था लेकिन कांग्रेस में सूत्रों की मानें तो किन्ही कारणों वश नवीन जिंदल ने खुद ही कुरुक्षेत्र से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है और ऐसे में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पूर्व सांसद कैलाशो सैनी का नाम आगे किया है जोकि जातिगत समीकरण के लिहाज से दुरुस्त भी हो सकता है। कुरुक्षेत्र से भाजपा ने नायब सैनी को उतारा है चूँकि ये भाजपा छोड़कर लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी बनाने वाले राजकुमार सैनी की जन्म व कार्यस्थली भी है और यहां सैनी समुदाय की काफी वोटें हैं।

भाजपा ने तो अभी तक हरियाणा की टिकटों के मामले में युवा शक्ति को मौका नहीं दिया है, कांग्रेस की युवा चेहरों पर नज़र है, पर दोनों ही संभावित जातिगत राजनीतिक मुनाफ़े को लपकने की भरपूर कोशिश में हैं। हालांकि, अन्य विपक्षी पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और हाल ही में अस्तित्व में आई जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के पत्ते अभी खुलने बाकी हैं।

No comments

Powered by Blogger.