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जींद उपचुनाव: 75.77 प्रतिशत वोटिंग, मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न



चंडीगढ़, 
28 जनवरी, 2019

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और हाल ही में अस्तित्व में आई जननायक जनता पार्टी (जजपा) के बीच त्रिकोणीय मुकाबले वाला जींद उपचुनाव सोमवार को लगभग 75.77 प्रतिशत मतदान के साथ शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

प्रदेश के संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी इन्द्रजीत ने कहा कि संवेदनशील तथा अति संवेदनशील बूथों पर वीडियोग्राफी भी करवाई गई। उन्होंने बताया कि उपचुनाव पूरी तरह से शांतिप्रिय रहा और किसी भी स्थान से कोई भी अप्रिय घटना की सूचना प्राप्त नहीं हुई है।

उन्होंने बताया कि जींद उपचुनाव में पहली बार वीवीपैट मशीनों का इस्तेमाल किया गया ताकि मतदाता को अपने मत के बारे में संपूर्ण जानकारी मिल सके। वीवीपैट मशीनों पर 7 सेकंड के लिए उम्मीदवार का चुनाव चिन्ह और उसका सीरियल नंबर दिखाई देता है, जिससे मतदाता को अपने वोट के बारे में पूरी जानकारी मिलती है।

उन्होंने बताया कि इस उपचुनाव में 39 बूथों पर वेबकास्टिंग करवाई गई और यहां बैठकर मॉनिटरिंग की जा रही थी।

कुल कुल एक लाख 72 हजरा 774 मतदाताओं वाले जींद विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले गांवों में 71 मतदान केन्द्र तथा शहरी क्षेत्र में 103 मतदान केन्द्र बनाये गये थे। इनमें 16 सहायक मतदान केन्द्र भी शामिल है।

जींद उपचुनाव को शांतिपूर्वक सम्पन्न करवाने के लिए भारी मात्रा में पुलिस बल की तैनाती की गई थी जिसके अंतर्गत 3000 पुलिस कर्मी व 500 होमगार्ड के जवान, एक सीआरपीएफ कंपनी व एक आरएएफ की कंपनी तैनात थी।

भाजपा ने तो जींद से दो बार विधायक रहे लोकप्रिय दिवंगत नेता हरिचंद मिड्डा के बेटे कृष्ण मिड्डा को उपचुनाव लड़वाया है तो कांग्रेस से वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला व जजपा से दिग्विजय चौटाला उपचुनाव के लिए मुख्य दावेदारों में से हैं।

वहीँ इंडियन नैशनल लोकदल (इनेलो) के उम्मेद सिंह रेडू व कुरुक्षेत्र सांसद राजकुमार सैनी की पार्टी लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी के पवन आश्री समेत कुल 21 उम्मीदवारों का भाग्य आज मतदान मशीनों में बंद हो गया है जोकि 31 जनवरी को खुलेगा।

जींद उपचुनाव हरियाणा की राजनीति में बहुत अहम माना जा रहा है क्यूंकि इसी साल प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव होने हैं। इस उपचुनाव का नतीजा ज़ाहिर तौर पे आने वाले चुनावों की रूपरेखा तैयार करेगा। दरअसल यह उपचुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव न होकर, प्रदेश में होने वाले आगामी चुनावों का शंखनाद है।

अभी-अभी प्रदेश के पांच नगर-निगमों  निकाय चुनावों में जीत का झंडा गाढ़ने भाजपा अगर ये उपचुनाव जीतती है तो न सिर्फ ये जींद विधानसभा पर भाजपा की पहली विजय होगी बल्कि इसके साथ मुख्यमंत्री लाल खट्टर का कद और बढ़ जाएगा।

वहीँ अगर नतीजा इसके विपरीत सुरजेवाला या दिग्विजय के पक्ष में आता है तो फिर ये मौजूदा भाजपा सरकार के लिए चिंता का विषय होगा।


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