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जींद उपचुनाव: दशकों पुराना रिकॉर्ड टूटने की कगार पर, पहली बार भाजपा या 47 वर्षों बाद फिर से जाट विधायक



चंडीगढ़,
16 जनवरी, 2019

क्या बीजेपी को मिलेगी जींद विधानसभा से पहली जीत?
या फिर 47 साल बाद फिर से चुना जाएगा कोई जाट विधायक... 

जींद उपचुनाव के लिए नामांकन वापसी की प्रक्रिया के बाद अब कुल 21 उम्मीदवार मुकाबले में बचे हैं, जिनमें से पांच उम्मीदवार जो अहम हैं वो हैं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कृष्ण मिढ़ा, कांग्रेस पार्टी के रणदीप सिंह सुरजेवाला, जननायक जनता पार्टी द्वारा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिग्विजय सिंह चौटाला, इंडियन नैशनल लोकदल (इनेलो) के उमेद सिंह रेढू व लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी के विनोद आशरी।

परन्तु 'जाटलैंड' जींद के उपचुनाव में प्रबल दावेदार केवल तीन हैं; बीजेपी के गैर-जाट कृष्ण मिढ़ा, जबकि दो सशक्त जाट प्रत्याशी रणदीप सुरजेवाला और दिग्विजय चौटाला।

जीत इन तीनों में से किसी की भी हो, पर जींद विधानसभा इस बार अपना चार दशक से भी पुराना रिकॉर्ड तोड़ने की कगार पर है।

अगर जीत मिढा के हिस्से आई तो जींद विधानसभा के राजीनीतिक इतिहास में बीजेपी की यह पहली जीत होगी क्यूंकि आज तक इस सीट पर कभी भी भाजपा अपना परचम नहीं लहरा सकी।

वहीँ अगर दोनों जाट दिग्गजों सुरजेवाला और चौटाला में से कोई भी यह उपचुनाव जीतता है तो तकरीबन 47 साल बाद कोई जाट उम्मीदवार फिर से जींद विधानसभा पर विजय हासिल करेगा क्यूंकि इस विधानसभा से आखिरी जाट विधायक दल सिंह को 1972 में चुना गया था।

गौरतलब है कि यूँ तो जींद विधानसभा में सबसे बड़ा वोट बैंक जाट समुदाय है मगर राजनीतिक पार्टियों की लोकप्रियता और जातिगत समीकरणों के तहत आवंटित टिकटों के मद्देनज़र पिछले चार दशकों से इस सीट पर जीत गैर-जाट उम्मीदवारों के हिस्से आ रही है।

इसका एक कारण यह भी है कि जींद विधानसभा के 1.70 लाख से अधिक मतदाताओं में करीबन 1 लाख 7  हजार वोटें शहरी हैं जो कि पंजाबी और बनिया बाहुल्य हैं जबकि कुल वोटों में से तकरीबन 50 हजार से अधिक जाट मतदाता हैं जो कि ज्यादातर ग्रामीण वोटें हैं।

जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए ही सत्तारूढ़ बीजेपी ने गैर-जाट कार्ड खेलते हुए टिकट कृष्ण मिढा को दिया है जो कि पंजाबी समुदाय से हैं। कृष्ण मिढा दिवंगत इनेलो विधायक डॉ हरि चंद मिढा के बेटे हैं और उन्होंने कुछ महीने पहले ही बीजेपी ज्वाइन की है।

हाल ही में तीन राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी को हराने वाली कांग्रेस पार्टी ने जींद उपचुनाव के राजनीतिक मायनों को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा से अपने दिग्गज नेता व राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरजेवाला को मैदान में उतार कर जींद मुक़ाबले में जान डाल दी है।

तो वहीँ मुक़ाबले की संजीदगी को देखते हुए जननायक जनता पार्टी ने भी फायरब्रांड युवा नेता दिग्विजय चौटाला को अपने समर्थित उम्मीदवार के तौर पर घोषित कर जींद उपचुनाव मुकाबले में और जान फूंक दी।
इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला का ये पहला विधानसभा चुनाव है।

बहरहाल, सभी राजनीतिक दलों व उम्मीदवारों के समर्थक भारी मात्रा में प्रदेश के अलग-अलग कोनों से साज़ो-सामान के साथ जींद पहुंच चुके हैं और वहाँ के सभी होटल और सराय राजनीतिक युद्ध कक्ष (वॉर रूम्स) में तबदील हो चुके हैं क्यूंकि आगामी लोकसभा व विधानसभा चुनावों के मद्देनजर जींद उपचुनाव का परिणाम प्रदेश में राजनीति मायने बदलेगा।

दशकों बाद जींद विधानसभा बीजेपी या जाट उम्मीदवार में से किसी एक को चुन कर बदलाव तो लाएगी पर देखना अब ये है कि रुख किस तरफ का होगा।

उपचुनाव के लिए मतदान आगामी 28 जनवरी को होगा। मतदान का समय सुबह 7 बजे से सांय 5 बजे तक रहेगा और 31 जनवरी को मतों की गिनती का कार्य पूरा कर परिणाम घोषित किया जाएगा।

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