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अधिकारों की लड़ाई के लिए 16 दिसंबर को सहारनपुर में इकट्ठा होगा गुर्जर समाज: धर्म सिंह छौक्कर



चंडीगढ़,
8 दिसम्बर, 2018  

आगामी लोकसभा चुनावों से के मद्देनज़र बढ़ती सियासी सरगर्मियों को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक रूप से पिछड़ा गुर्जर समाज अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए आगामी 16 दिसम्बर को सहारनपुर में इकट्ठा होगाl




यह जानकारी देते हुए कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक धर्म सिंह छौक्कर ने बताया कि सहारनपुर में 16 दिसम्बर को राष्ट्रीय स्तर का अखिल भारतीय गुर्जर सम्मेलन होगा जिसके माध्यम से राजनीतिक दलों को अपनी ताकत दिखाने का काम किया जाएगाl



आज यहाँ प्रेस क्लब में इसी सिलसिले में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए छोक्कर ने कहा कि गुर्जरों को समाज और राजनीति में वो स्थान नहीं मिला जिसके वो हकदार हैंl संगठित न होने के कारण गुर्जर समाज की राजनीतिक अनदेखी हो रही है और इसी के चलते सम्मलेन के ज़रिये गुर्जरों को इकठ्ठा करने का निर्णय लिया गया हैl


उन्होंने कहा, "1989 में  स्वर्गीय राजेश पायलट ने समालखा विधानसभा में अखिल भारतीय समेलन किया था उस समय लाखों की संख्या में लोगों ने सम्मेलन में शिरकत की थीl उसके बाद गुर्जर समाज राजनीतिक दृष्टि से काफी पिछड़ गया और पायलट के निधन के बाद गुर्जरों की राष्ट्रीय स्तर पर अनदेखी हुई हैl आज आप देखें कि गुर्जर समाज का इतना गौरवशाली इतिहास होने के बावजूद हमारे पूर्वजों के नाम पर न तो कोई स्मारक है ना कोई यूनिवर्सिटीl राजनीति में भी समाज को लगातार नज़र अंदाज़ किया गया हैl राजस्थान और मध्यप्रदेश में अनुपात के हिसाब से गुर्जर समाज को कम टिकेट दिए गए हैंl इस सम्मेलन के माध्यम से देश को गुर्जर समाज की ताकत दिखाने का काम किया जाएगाl"

गुर्जर समाज का सम्मेलन के लिए आह्वान करते हुए छौक्कर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में इस समेलन को करने का फैसला इसलिए किया गया कि वहां पर गुर्जर समाज के एमएलए तो विधानसभा में है लेकिन मंत्री पद नही हैl

धर्म सिंह छौक्कर ने कहा कि हरियाणा की 16 सीट पर गुर्जर समाज बाहुल्य है और 26 सीट पर गुर्जर वोट 10 हजार से ज्यादा हैंl

लम्बे समय से गुर्जर समाज राजनीति में अपने लिए अपर्याप्त प्रतिनिधित्व के मुद्दे को उठाता रहा हैl समाज के लोगों का कहना है कि देश को लोहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और राजेश पायलट जैसे दिग्गज देने वाले गुर्जर समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में हमेशा वंचित रखा गया हैl

समाज की सेना में गुर्जर रेजिमेंट की माँग भी बहुत पुरानी है और अभी तक पूरी नहीं हुई हैl कुछ महीनों पहले शहीद हुए सेना के जवान औरंगज़ेब की शहादत के बाद इस माँग को आंदोलन के ज़रिये और सोशल मीडिया पर गुर्जर समाज के नौजवानों द्वारा पुरज़ोर तरीके से उठाया गया पर सरकार की तरफ से अभी तक इस पर कोई आश्वासन नहीं दिया गया हैl   

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