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कृषि अध्यादेशों को लेकर केंद्रीय मंत्री से मिला हरियाणा भाजपा प्रतिनिधिमंडल, मांगों पर विचार का मिला आश्वासन

 



चंडीगढ़, 

15 सितम्बर 2020 

वर्तमान में किसान आंदोलन की अहम वजह रहे कृषि अध्यादेशों को लेकर आज हरियाणा से भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ के नेतृत्त्व में एक प्रतिनिधिमंडल केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर से मिला और ज्ञापन के माध्यम से आठ मांगे व सुझाव किसानों के लिए रखे.

धनखड़ के अनुसार केद्रीय कृषि मंत्री ने तीनों अध्यादेशों पर चर्चा के बाद सुझावों को बिल में शामिल करने का आश्वासन दिया.

साथ ही केंद्रीय कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि अध्यादेशों से फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. मंडियों में खरीद पहले की तरह होगी और मंडी व एमएसपी को लेकर कोई किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया. किसानों को किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी. अध्यादेश किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए ही बनाए गए है. 

ज्ञापन के साथ किसानों के सुझाव और मांगों को लेकर केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि आपके सुझावों को भी शामिल करंगे और आपकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा.  

धनखड़ ने बताया कि कृषि अध्यादेशों को लेकर प्रदेश के किसानों के आठ सुझाव ज्ञापन में सौंपे गए हैं जिसमें मुख्य तौर पर यह शामिल है कि एमएसपी की व्यवस्था ज्यों की त्यों बनी रहे, मंडियों में सरकारी ख़रीद ज्यों की त्यों बनी रहें, किसान को खुद व किसान उत्पादक संघ के अपने सदस्यों के अपने उत्पाद के खुदरा व्यापार का हम स्वागत करते हैं. 

इनके अलावा, यदि अन्य कोई भी किसानों के उत्पाद का व्यापार करता है तो गारंटी की व्यवस्था ज़रूर की जायें जिससे कोई किसानों से व्यापार करके भाग ना जायें, उप मंडल अधिकारी के माध्यम से विवाद निपटान का निर्णय उचित है क्योंकि अदालतों में लम्बा समय लग जाता है और अधिकारी के साथ एक समिति बना दी जाए जिसमें दो किसान प्रतिनिधि व दो व्यापारी प्रतिनिधि जोड़ दिये जाएं.

सभी ई-प्लेटफ़ार्म सरकारी हो या सरकार की कठोरतम निगरानी में रखे जाए जिससे किसानों के साथ कोई धोखा धड़ी ना कर सके. 

जहां भी ख़रीद-बिक्री हो राज्य सरकार का ई-मंडी प्लेटफ़ॉर्म उपलब्ध हो, जिससे हर ख़रीद फ़रोख़्त उस पर चढ़े विवाद के समय सरकार को निपटाने में आसानी रहे व जानकारी रहे. तथा इस प्लेटफ़ार्म पर जे फार्म जनरेट हो जाएं और अंतिम ये कि किसानों को सीधा भुगतान हो.

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