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रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम व तीन अन्य को उम्रकैद की सज़ा



चंडीगढ़,
17 जनवरी, 2019

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को उम्रकैद की सज़ा सुनाई है।

सीबीआई अदालत ने आज इस मामले में दोषी ठहराए गए गुरमीत राम रहीम, कृष्ण लाल, कुलदीप और निर्मल को वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के ज़रिये उम्रकैद की सजा सुनाई। चारों को 11 जनवरी को रामचंद्र छत्रपति की हत्या के जुर्म में दोषी ठहराया गया था।

गुरमीत राम रहीम को 50000 रूपये का जुर्माना भी लगाया गया। सभी दोषियों को 50-50 हजार रुपये जुर्माना किया गया है औऱ जुर्माना नही भरने पर 2-2 साल की सज़ा अतिरिक्त काटनी होगी।

आर्म्स एक्ट के तहत किशन लाल और निर्मल सिंह को 3-3 साल की अतिरिक्त सजा दी गई औऱ 5-5 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है और जुर्माना नही भरने पर 2-2 महीने की सज़ा अतिरिक्त काटनी होगी।

गुरमीत राम रहीम यौन शोषण व बलात्कार के जुर्म में प्रदेश की रोहतक स्थित सुनारिया जेल में 20 साल की सज़ा काट रहे हैं जबकि बाकि तीनों अन्य दोषी अंबाला जेल में बंद हैं।

राम रहीम की सज़ा पहले की 20 साल की सज़ा पूरी होने के बाद शुरू होगी। सुप्रीम कोर्ट की एक फैसले के तहत चारों दोषियों को ताउम्र जेल में रहना होगा। सीबीआई के अधिवक्ता एचपीएस वर्मा ने यह जानकारी दी।

रामचंद्र छत्रपति सिरसा से अपना संध्या अखबार पूरा सच छापते थे, 2002 में छत्रपति ने अपने अखबार में डेरे में धर्म के नाम साध्वियों के शोषण से सम्बंधित खबर को उजागर किया जीवन बर्बाद'' शीर्षक से खबर छाप दी।

इसके बाद रामचंद्र छत्रपति को धमकियां मिलनी शुरु हुई पर छत्रपति मामले को उजागर करते रहे और  अक्टूबर, 2002 में रामचंद्र छत्रपति को गोलियां मारी गयी जिसके चलते नवंबर 2002 में अस्पताल में मौत हो गई थी।

रामचंद्र के बेटे अंशुल ने 2003 में याचिका दायर की जिसके फलस्वरूप पंजाब एंव हरियाणा हाई कोर्ट ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए। उसी साल डेरे ने याचिका डाल सीबीआई जांच पर रोक के लिए याचिका दायर की मगर 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच बरकरार रखने के आदेश दिए।

जुलाई 2007 में सीबीआई ने राम रहीम समेत अन्य आरोपियों केखिलाफ चार्जशीट दायर की।


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